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सन्देश
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गोरखपुर / चरगांवा
• 30-05-2026
आयुष विश्वविद्यालय में टेलीमेडिसिन-टीकाकरण होगा शुरू, कैंसर स्क्रीनिंग संग बनेगा इंटीग्रेटेड हेल्थ हब
रूरल न्यूज नेटवर्क।महायोगी गुरु
गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय अब एक इंटीग्रेटेड हेल्थ हब के रूप में विकसित हो रहा
है। यहां मरीजों की सुविधा के लिए टेलीमेडिसिन, टीकाकरण और
कैंसर की शुरुआती जांच (स्क्रीनिंग) जैसी नई सेवाएं शुरू की जा रही हैं। यह पहल
काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के मॉडल पर
आधारित है, जिसका उद्देश्य आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के
समन्वय से पूर्वांचल के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना है।
विश्वविद्यालय की ओपीडी में
आने वाले जिन मरीजों में कैंसर के शुरुआती लक्षण पाए जाएंगे, उन्हें टेलीमेडिसिन के माध्यम से देश के बड़े कैंसर
विशेषज्ञों से जोड़ा जाएगा। आयुष चिकित्सक वीडियो कॉल के जरिए तत्काल ऑन्कोलॉजिस्ट
से परामर्श की व्यवस्था करेंगे।
आधुनिक निदान के बाद, आयुर्वेद की भूमिका सहायक देखभाल में होगी। कीमोथेरेपी और
रेडियोथेरेपी के दुष्प्रभावों को कम करने के लिए शतावरी, गिलोय और यशद भस्म जैसी आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग किया
जाएगा, जिससे मरीजों को उपचार के दौरान शारीरिक और
मानसिक रूप से मजबूती मिलेगी।
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इसके अतिरिक्त, विश्वविद्यालय में गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, किशोरियों और
नवजात शिशुओं के नियमित टीकाकरण की व्यवस्था भी शुरू की जा रही है। आयुष मंत्री
डॉ. दयाशंकर मिश्र उर्फ दयालु के निर्देश पर दैनिक सेवाओं को मजबूत किया जा रहा
है।
गर्भवती महिलाओं को अब आयुष
ओपीडी में ही एंटीनेटल चेकअप के साथ टिटनेस टॉक्साइड (TT) का टीका लग सकेगा। इससे उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र
जाने की आवश्यकता नहीं होगी। नवजात शिशुओं को जन्म के समय बीसीजी, ओपीवी और हेपेटाइटिस-बी के टीके यहीं लगाए जाएंगे। माताएं 45 दिन बाद पेंटावेलेंट टीके के लिए भी यहीं वापस आएंगी, जिससे टीकाकरण ड्रॉपआउट दर में कमी आने की उम्मीद है।
10 से 19 वर्ष की किशोरियों को
रुबेला और टीडी (TD) के टीके लगाए जाएंगे। साथ
ही, खून की कमी दूर करने के लिए आयुर्वेदिक लौह भस्म और
द्राक्षासव जैसी दवाएं भी दी जाएंगी। कुलपति डॉ. के रामचंद्र रेड्डी ने बताया कि
विश्वविद्यालय का लक्ष्य अब केवल आयुर्वेद तक सीमित न रहकर आधुनिक स्वास्थ्य
सेवाएं भी प्रदान करना है।