आयुष विश्वविद्यालय की फार्मेसी में अब तरल औषधियों का निर्माण, पहले चरण में आंवला जूस तैयार करने की योजना, तीन आधुनिक मशीनें स्थापित
रूरलन्यूजनेटवर्क।महायोगी
गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय की फार्मेसी में अब तरल औषधियों का निर्माण किया जाएगा।
पहले चरण में आंवला जूस तैयार करने की योजना है। इसके लिए तीन आधुनिक मशीनें स्थापित
की गई हैं, जिनका ट्रायल पूरा हो चुका है। जल्द ही इन मशीनों से औषधि निर्माण कार्य
शुरू कर दिया जाएगा।
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वर्तमान में विश्वविद्यालय
की फार्मेसी में शुगर नियंत्रित करने वाली मधुमेहारी सहित विभिन्न चूर्ण औषधियां बनाई
जा रही हैं। तरल और अन्य औषधियों की निर्माण क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से ये नई मशीनें
लगाई गई हैं।
फार्मेसी की कार्य क्षमता
में वृद्धि के लिए दिल्ली से तीन मशीनें मंगाई गई हैं। दिल्ली से आए कंपनी के इंजीनियर
प्रदीप कुमार सिंह ने इनका सफल ट्रायल पूरा कर लिया है। उन्होंने बताया कि इनमें से
एक 'डिसइंटीग्रेटर' मशीन है, जो विभिन्न प्रकार के कच्चे माल को पाउडर या छोटे टुकड़ों
में बदलती है। इसके बाद उसका पाउडर बनाया जाता है।
दूसरी मशीन 'पल्पर' है,
जिसमें कच्चे माल को पानी के साथ मिलाकर पल्प तैयार किया जाता है। इस मशीन का उपयोग
आंवला जूस सहित अन्य तरल औषधियों के निर्माण में किया जाएगा।
कुलपति डाक्टर के रामचंद्र
रेड्डी ने बताया कि औषधियों की बढ़ती डिमांड को देखते हुए विश्वविद्यालय के फार्मेसी
में लगातार छमता वृद्धि की जा रही है।