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gorakhpur, cm yogi, Center of Excellence 07-Apr-2026 03:56 PM

महाराणा प्रताप इंस्टीच्यूट आफ टेक्नोलाजी में सेंटर आफ एक्सीलेंस का उदघाटन 15 अप्रैल को, सीएम करेंगे उदघाटन

रूरल न्यूज नेटवर्क। महाराणा प्रताप इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MPIT) में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस शुरू होने जा रहा है। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा सेंटर होगा, जिसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (TCS) के सहयोग से बनाया गया है।

इसका उद्घाटन 15 अप्रैल को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। इस कार्यक्रम में टीसीएस एवं टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन भी मौजूद रहेंगे। इस मौके पर MPIT ने एआई फॉर आल ट्रेनिंग ट्रेनिंग वर्कशॉप शुरू करने की तैयारी की है।

इसके लिए 5 लाख युवाओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। यह वर्कशॉप 60 दिन की होगी और पूरी तरह मुफ्त होगी। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और साइबर सिक्योरिटी की जानकारी दी जाएगी। यह पहल MPIT, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, टाटा कंसल्टेंसी सर्विस और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के साथ मिलकर चलाई जाएगी।

ट्रेनिंग वर्कशॉप के लिए पंजीकरण शुरू

MPIT के निदेशक सुधीर अग्रवाल ने बताया- ट्रेनिंग वर्कशॉप के लिए पंजीकरण शुरू हो गया है। इसका लिंक MPIT की वेबसाइट पर उपलब्ध है। 9 अप्रैल तक पंजीकरण किया जा सकता है।

एआई अवेयरनेस फॉर आल के साथ ही किसानों और कृषि विद्यार्थियों के लिए ‘एआई अवेयरनेस फॉर फार्मर्स’ वर्कशॉप के लिए पंजीकरण शुरू किया गया है। इसमें एक हजार किसानों और कृषि विद्यार्थियों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। वर्कशॉप पूर्णतः निशुल्क है और इसका शुभारंभ भी 15 अप्रैल को होगा।

एआई अवेयरनेस तथा साइबर सिक्योरिटी अवेयरनेस प्रोग्राम में एआई का परिचय, जेनेरेटिव एआई टूल्स, प्रॉम्प्टिंग एंड प्रोडक्टिविटी, रिस्पांसिबल एआई यूज, साइबर हाइजीन, फ्रॉड प्रिवेंशन, पासवर्ड एंड ओटीपी सेफ्टी और सेफ डिजिटल प्रैक्टिसेज के बारे में विस्तृत प्रशिक्षण प्राप्त होगा।

जबकि एआई अवेयरनेस फॉर फार्मर्स वर्कशॉप में कृषि में एआई, मौसम और फसल योजना, डिजिटल फार्मिंग टूल्स और रूरल प्रोडक्टिविटी सपोर्ट के बारे में विस्तार से व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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50 करोड़ रुपए की लागत से बना सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

महाराणा प्रताप इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MPIT) में टीसीएस के सहयोग से पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस करीब 50 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित हुआ है। इसे विश्व स्तरीय मानक के अनुरूप विकसित किया गया है।

इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस कॉम्प्लेक्स में ड्रोन टेक्नोलॉजी एंड थ्री डी प्रिंटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस टेक्नोलॉजी, साइबर सिक्युरिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कुल छह तरह के पाठ्यक्रम (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्युरिटी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, स्पेस टेक्नोलॉजी, थ्री डी प्रिंटिंग समेत एकीकृत पाठ्यक्रम) संचालित होंगे।

बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स में हर पाठ्यक्रम के लिए एक अलग सेंटर ऑफ एक्सीलेंस होगा। MPIT के निदेशक सुधीर अग्रवाल के अनुसार सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के ढांचागत निर्माण पर 19.35 करोड़ रुपए, फर्नीचर व फर्निशिंग पर 2.40 करोड़।

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ड्रोन टेक्नोलॉजी सेंटर पर 1.84 करोड़, एआई सेंटर पर 9.56 करोड़, स्पेस टेक्नोलॉजी सेंटर पर 2.09 करोड़, साइबर सिक्योरिटी सेंटर पर 6.19 करोड़ और थ्री डी प्रिंटिंग सेंटर पर 6.79 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।

MPIT से 15 अन्य संस्थानों को भी मिलेगा लाभ

MPIT का सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश के तकनीकी संस्थानों के लिए एक बड़ा केंद्र बनेगा। यहां सिर्फ MPIT के छात्र ही नहीं, बल्कि अन्य कॉलेजों के छात्र भी आधुनिक और ग्लोबल कोर्सेज का लाभ उठा सकेंगे।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) से मान्यता प्राप्त 15 तकनीकी संस्थानों को इस सेंटर से जोड़ा जाएगा। इससे छात्रों को नई तकनीक और इंडस्ट्री आधारित प्रशिक्षण मिलेगा।

इन संस्थानों को मिलेगा फायदा

इस पहल से जिन प्रमुख संस्थानों को लाभ मिलेगा, उनमें शामिल हैं:

  • मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय।
  • राजकीय पॉलिटेक्निक गोरखपुर।
  • राजकीय महिला पॉलिटेक्निक गोरखपुर।
  • महामाया राजकीय पॉलिटेक्निक हरिहरपुर खजनी।
  • नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी गोरखपुर सेंटर।
  • महाराणा प्रताप पॉलिटेक्निक गोरखपुर।
  • बुद्धा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गीडा गोरखपुर।
  • बुद्धा पॉलिटेक्निक कॉलेज गीडा गोरखपुर।
  • आईटीएम गीडा गोरखपुर।
  • आईटीएम पॉलिटेक्निक गीडा गोरखपुर।
  • केआईपीएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी गीडा गोरखपुर।
  • लिटिल फ्लावर पॉलिटेक्निक गोरखपुर।
  • महामानव गौतम बुद्ध पॉलिटेक्निक बनकटी खुर्द।
  • सुयश इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी हक्काबाद गोरखपुर।
  • विकास इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी गोरखपुर।
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