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गोरखपुर / चरगांवा
• 24-01-2026
मां की याद में बनाई 'हैप्पी बर्थडे' फिल्म को 'सेकेंड बेस्ट फिल्म' अवॉर्ड
रूरल न्यूज नेटवर्क।गोरखपुर के रजत सिंह राजपूत की लिखी गई
फिल्म 'हैप्पी बर्थडे' को गोरखपुर सिनेमा महोत्सव में सेकेंड बेस्ट फिल्म अवॉर्ड मिला।
अपनी इस सफलता का श्रेय पूरी टीम को देते हुए उन्होंने बताया कि यह कहानी कहीं न कहीं
मेरी ही है।
मैंने देखा है कि मेरे
सपने को पूरा करने के लिए माता- पिता ने कितना संघर्ष किया है। उन्होंने बताया कि मुझे
फिल्म स्कूल भेजने में मेरी मां का सबसे बड़ा हाथ है। 6 महीने पहले उनका निधन हो गया।
उन्हीं के याद में मैंने यह स्टोरी लिखी। मेरी यह फिल्म मेरी मां समर्पित है।
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'सिनेमा वाला' फिल्म
प्रोडक्शन से जुड़ें रजत इस समय के 'सिनेमा वाला' फिल्म प्रोडक्शन से जुड़ें हैं। इसी
प्रोडक्शन की ओर से बनाई गई फिल्म 'हैप्पी बर्थडे' को गोरखपुर सिनेमा महोत्सव में दूसरा
बेस्ट फिल्म अवॉर्ड मिला। इस फिल्म का लेखन और निर्देशन रजत सिंह राजपूत ने किया।
मेन कैरेक्टर्स ने फिल्म
में डाली जान
फिल्म के मेन कैरेक्टर्स
रजत सिंह राजपूत, अंकिता सिंह, चंदन यादव, बिक्की प्रजापति, अंतिमा यादव, तान्या जायसवाल,
समरेश मिश्रा और पलक मिश्रा ने अपने इंप्रेसिव एक्टिव से फिल्म में जान डाल दी।
फिल्म का साउंड डिजाइन
शिवम वर्मा ने किया, जबकि इसकी सिनेमैटोग्राफी राहुल शर्मा, अखिल, शिव नारायण सिंह
चौहान और चंदन यादव ने की है। फिल्म के संपादन भी चंदन यादव ने मुख्य भूमिका निभाई
है।
'हैप्पी बर्थडे' की कहानी
रजत ने बताया कि फिल्म
'हैप्पी बर्थडे' खाने की बर्बादी के भयावह रूप को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।
कहानी एक ऐसे पिता के इर्द-गिर्द घूमती है।
जिसकी बेटी अपने जन्मदिन
पर केक की इच्छा जताती है, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण पिता उसकी यह छोटी-सी इच्छा पूरी
नहीं कर पाता। अंत में उसे एक डैबिन में केक मिलता है उसे अपनी बेटी के लिए लेकर आता
है।
वहीं दूसरी ओर फिल्म
में एक ऐसे परिवार को दिखाया गया है, जिसके लिए वही केक कोई महत्व नहीं रखता और उसे
कूड़े के ढेर में फेंक दिया जाता है। फिल्म का अंत दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर देता
है। उनकी
पूरी जो टीम है उन्हें अपने- अपने कामों में बचपन से ही रुचि रही है। सबके अलग- अलग
गुण मिलकर एक मजबूत टीम बनी। इस फिल्म की सफलता का श्रेय सभी टीम मेंबर को जाता है।
हम सब की रूचि ने 'सिनेमावाला फिल्म प्रोडक्शन' को जन्म दिया है।
गोरखपुर में हुई शूटिंग
रजत बताते हैं कि इस फिल्म की शूटिंग के लिए कहीं और नहीं बल्कि गोरखपुर के अलग- अलग
लोकेशन का इस्तेमाल किया है। हमें लोकेशन को लेकर ज्यादा परेशान नहीं होना पड़ा आसानी
से हमने शूटिंग स्पॉट तय किए।
80,000 की लागत में तैयार
हुआ फिल्म
रजत ने बताया कि चूकि
यह एक शार्ट स्टोरी है इसलिए इसे बनाने में ज्यादा खर्च नहीं आया है। हमने इसे बहुत
ही सस्ते में 80,000 की लागत में तैयार किया है।
लगभग एक साल की मेहनत
रंग लाई रजत ने बताया- इस फिल्म को बनाने में लगभग एक साल का समय लगा। 6 महीने पहले
स्क्रिप्ट लिखी और 6 महीने में शूटिंग और बाकी काम किया है। उम्मीद है लोगों को यह
काफी पसंद आए।
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'ड्रीम्स' को मिले 12 इंटरनेशनल
अवॉर्ड रजत ने बताया पिछले साल गोरखपुर सिनेमा महोत्सव में हमारी फिल्म 'ड्रीम्स लगी
थी जिसे लोगों ने खूब पसंद किया। उस फिल्म को 12 इंटरनेशनल अवॉर्ड मिल चुके हैं और
यहां सेकेंड बेस्ट फिल्म अवॉर्ड मिला था।