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Saturday, 16th May, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर
यूनिवर्सिटी में सत्र 2026-27 से मास्टर ऑफ फार्मेसी (M.Pharm) शुरू करने का रास्ता साफ हो
गया है। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने फार्मास्यूटिकल केमिस्ट्री और
फार्मास्यूटिक्स के दो कोर्स को अप्रूवल दे दिया है। इससे यूनिवर्सिटी में ड्रग
रिसर्च, मैन्युफैक्चरिंग
और क्वालिटी कंट्रोल से जुड़े सेक्टर को सीधा बूस्ट मिलेगा।
यूनिवर्सिटी
प्रशासन के मुताबिक, दोनों कोर्स के लिए भेजे गए प्रपोजल को PCI ने क्लियर कर
दिया है। नए सेशन से हर कोर्स में 15-15 सीटों पर एडमिशन होगा। PCI ने गाइडलाइन के
तहत टीचिंग, नॉन-टीचिंग और
टेक्निकल स्टाफ की भर्ती के साथ एईबीएस पोर्टल पर सभी जरूरी डिटेल्स अपडेट करने के
निर्देश भी दिए हैं।
रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा
कुलपति प्रो.
पूनम टंडन ने कहा कि M.Pharm की शुरुआत से कैंपस में ग्रेजुएशन से लेकर एडवांस रिसर्च तक
की पूरी अकैडमिक चेन मजबूत होगी। उन्होंने इसे यूनिवर्सिटी के मजबूत
इंफ्रास्ट्रक्चर, अपग्रेडेड लैब्स, स्किल्ड फैकल्टी और रिसर्च ड्रिवन एनवायरनमेंट
का रिजल्ट बताया। उनका कहना है कि इससे यूनिवर्सिटी प्रदेश में फार्मेसी एजुकेशन
और इनोवेशन का इमर्जिंग हब बन सकती है।
सभी मेजर कोर्स होंगे अवेलेबल
इससे पहले
यूनिवर्सिटी में डीफार्म और बीफार्म कोर्स संचालित हैं, जिनमें 60-60 सीटों पर
एडमिशन होता है, जबकि बीफार्म की सीटें बढ़ाकर 100 की जा चुकी हैं। सत्र 2025-26
से फार्मेसी
में P.hd प्रोग्राम भी
शुरू हो चुका है। अब M.Pharm के जुड़ने से यूनिवर्सिटी में फार्मेसी फील्ड के सभी मेजर
कोर्स एक ही कैंपस में अवेलेबल हो जाएंगे।
अब तक पूर्वांचल के स्टूडेंट्स को M.Pharm या फार्मेसी में P.hd के लिए दूसरे स्टेट्स जाना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा गोरखपुर में ही मिलने से उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे लोकल स्टूडेंट्स को डायरेक्ट बेनिफिट मिलेगा और उनका टाइम व खर्च दोनों बचेगा।