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gorakhpur, cm yogi, Treatment, Epidermolysis 24-Apr-2026 02:53 PM

एम्स में एपिडर्मोलाइसिस बुलोसा डिस्टोफिका का उपचार शुरू, हल्की चोट में भी फफोले, दुर्लभ आनुवांशिक रोग से जूझ रहा 3 साल का मासूम

रूरल न्यूज नेटवर्क। एम्स के त्वचा रोग विभाग में एक दुर्लभ और जटिल आनुवंशिक रोग एपिडर्मोलाइसिस बुलोसा डिस्टोफिका (ईबीडी) से पीड़ित बच्चे का उपचार शुरू हुआ है। पडरौना निवासी एक किसान का तीन वर्षीय बेटा इस बीमारी से ग्रस्त है, जिसमें उसकी त्वचा इतनी पतली हो चुकी है कि हल्का सा झटका लगते ही फफोले पड़ जाते हैं।

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परिजनों के अनुसार, जन्म के कुछ दिनों बाद ही बच्चे की त्वचा असामान्य रूप से नाजुक दिखने लगी थी। शुरुआत में परिवार को लगा कि बच्चे के बड़े होने पर त्वचा सामान्य हो जाएगी, लेकिन समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती गई। कई स्थानीय डॉक्टरों से उपचार कराने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। जब कहीं फायदा नहीं हुआ, तो बच्चे को एम्स गोरखपुर के त्वचा रोग विभाग में दिखाया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. सुनील कुमार गुप्ता ने बच्चे की जांच की, जिसमें उसे ईबीडी रोग होने की पुष्टि हुई।

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प्रोटीन की कमी से कमजोर होती त्वचा

विशेषज्ञों के अनुसार, यह रोग आनुवंशिक कारणों से होता है। इसमें त्वचा की संरचना को मजबूत रखने वाले प्रोटीन में दोष होता है। इसके कारण त्वचा की परतें आपस में जुड़ी नहीं रह पातीं और मामूली घर्षण या चोट से भी अलग होकर फफोले और घाव बन जाते हैं। संक्रमण का खतरा बढ़ने के साथ-साथ स्थायी निशान और शारीरिक विकृति भी हो सकती है।

 ऐसे पहचानें लक्षण

इस बीमारी के लक्षणों में जन्म के समय या शैशवावस्था में ही फफोलों का दिखना, त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली में बार-बार घाव होना, नाखूनों का क्षय या विकृति, उंगलियों का आपस में चिपक जाना और पोषण की कमी के साथ वृद्धि में बाधा शामिल हैं।

स्थायी इलाज नहीं, लक्षणों पर नियंत्रण ही उपाय

डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी (ईबीडी) का कोई स्थायी उपचार नहीं है। इसका उपचार लक्षणों को नियंत्रित करने, संक्रमण को रोकने और बच्चे के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने पर केंद्रित होता है। इसमें घावों की नियमित ड्रेसिंग, दर्द प्रबंधन, पोषण संबंधी सहायता और बहु-विषयक देखभाल की आवश्यकता होती है।

परिजनों को दिया जा रहा प्रशिक्षण

एम्स गोरखपुर में बच्चे के परिजनों को विशेष ड्रेसिंग तकनीक, संक्रमण की रोकथाम, पोषण संबंधी सलाह और मानसिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे घर पर भी बच्चे की सही देखभाल कर सकें।

पीडियाट्रिक डर्मेटोलाजी स्पेशियलिटी क्लिनिक की हुई शुरुआत

एम्स गोरखपुर में बच्चों के त्वचा रोगों के बेहतर इलाज के लिए पीडियाट्रिक डर्मेटोलॉजी स्पेशियलिटी क्लिनिक की शुरुआत की गई है। यह क्लिनिक प्रत्येक सोमवार दोपहर दो बजे से शाम चार बजे तक संचालित होती है। यहां बच्चों के त्वचा संबंधी रोगों का विशेषज्ञ परामर्श एवं समग्र प्रबंधन उपलब्ध रहता है।

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ

एम्स गोरखपुर के त्वचा रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डा. सुनील कुमार गुप्ता ने बताया कि एपिडर्मोलाइसिस बुलोसा डिस्टोफिका जैसे दुर्लभ रोगों का प्रबंधन बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। हमारा प्रयास है कि आधुनिक सुविधाओं और बहु-विषयक टीम के जरिए मरीजों को बेहतर से बेहतर देखभाल दी जाए, साथ ही परिवार को भी दीर्घकालिक प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया जाए।

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