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Saturday, 16th May, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर एम्स में अब मेडिसिन विभाग के डॉक्टर
किडनी रोगियों का भी उपचार करेंगे। चेयरमैन पद्मश्री डॉ. हेमंत कुमार ने यह
निर्देश दिए हैं। किडनी रोग से पीड़ित मरीजों को एम्स से वापस नहीं भेजा
जाएगा। डॉ. हेमंत कुमार, जो स्वयं एक वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट हैं, नेफ्रोलॉजिस्ट की तैनाती होने तक फोन पर
परामर्श के लिए उपलब्ध रहेंगे। वह एम्स में नेफ्रोलॉजिस्ट की नियुक्ति सुनिश्चित
करने के लिए भी प्रयासरत हैं।
इसके अतिरिक्त, सर्जरी विभाग में
चल रही छह से सात महीने की प्रतीक्षा सूची को जल्द से जल्द समाप्त करने के लिए भी
रणनीति बनाई जा रही है। यह निर्णय शनिवार देर शाम तक हुई एम्स की इंस्टीट्यूट बॉडी
और गवर्निंग बॉडी की बैठक में लिए गए। बैठक में पुराने लंबित मामलों पर गहन चर्चा
हुई, जिसमें एम्स को अनुसंधान, चिकित्सा शिक्षा और रोगी देखभाल का केंद्र
बनाने पर जोर दिया गया। बैठक के दौरान, चेयरमैन ने
इमरजेंसी वार्ड में तैनात डॉक्टर के बारे में जानकारी ली। उन्हें बताया गया कि डॉ.
अरूप मोहंती इमरजेंसी में कार्यरत हैं।
चेयरमैन ने बताया कि तीन स्थायी समितियों का गठन किया गया
है: स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी (9 सदस्य), स्टैंडिंग एकेडमिक
कमेटी (8 सदस्य) और स्टैंडिंग सिलेक्शन कमेटी (7 सदस्य)। एक एचआर सब-कमेटी भी बनाई गई है। सभी
विभागाध्यक्षों और डॉक्टरों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी समस्या को पहले
कार्यकारी निदेशक के समक्ष प्रस्तुत किया जाए। एम्स की इंस्टीट्यूट बॉडी में 17 सदस्य होते हैं, जिनमें से एक पद
वर्तमान में रिक्त है, जबकि गवर्निंग बॉडी में 11 सदस्य होते हैं।