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Saturday, 6th June, 2026
चरगांवा
रूरल न्यूज नेटवर्क। गोरखपुर के शहीद अशफाक
उल्ला खां प्राणि उद्यान में एक खास पहल शुरू की गई है। अब तक आपने लोगों के पहचान
पत्र के बारे में सुना होगा, लेकिन अब पेड़ों की भी अपनी
पहचान होगी। यहां लगाए गए पौधों और पेड़ों पर ID कार्ड लगाए जाएंगे। इन
कार्ड में पेड़ का नाम, उसकी प्रजाति और पूरी जानकारी दर्ज रहेगी।
साथ ही QR कोड की मदद से
कोई भी व्यक्ति मोबाइल पर उस पेड़ की पूरी जानकारी देख सकेगा। इस पहल की शुरुआत
व्यापारी नेता आलोक अग्रवाल की ओर से की गई है। मकसद है कि लोग सिर्फ पौधे लगाने
तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें बचाने और उनकी देखभाल के लिए भी आगे आएं। चिड़ियाघर में
लगाए जा रहे पौधे अब आम पौधों की तरह नहीं रहेंगे। हर पौधे का अपना पहचान पत्र
होगा। इसमें पौधे का नाम, उसकी किस्म और
वैज्ञानिक जानकारी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा पौधों पर QR कोड लगाया जाएगा। जैसे ही कोई व्यक्ति मोबाइल से इस कोड को
स्कैन करेगा, उसके सामने पौधे से जुड़ी पूरी जानकारी आ जाएगी।
इससे लोग आसानी से जान सकेंगे कि यह कौन सा पेड़ है और इसकी क्या खासियत है।
जानवरों के साथ पेड़-पौधों
के बारे में भी जानेंगे लोग
चिड़ियाघर आने वाले लोगों
के लिए यह पहल काफी फायदेमंद होगी। अभी तक लोग यहां जानवरों को देखने आते थे, लेकिन अब उन्हें पेड़-पौधों की दुनिया को समझने का भी मौका
मिलेगा। खासकर बच्चों और स्कूल-कॉलेज के स्टूडेंट्स के लिए यह जगह सीखने का केंद्र
बनेगी। बच्चे किताबों में पढ़े गए पौधों को सामने देखकर उनके बारे में आसानी से
जानकारी ले सकेंगे।
आलोक अग्रवाल ने बताया कि
अक्सर लोग पौधारोपण करते हैं, लेकिन कुछ समय
बाद लगाए गए पौधों की देखभाल नहीं हो पाती। कई पौधे बिना देखरेख के खराब हो जाते
हैं। उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था से हर पौधे की पहचान रहेगी। पौधा कहां लगा है
और उसकी स्थिति कैसी है, इसकी निगरानी
की जा सकेगी। इससे पौधों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण को तकनीक से
जोड़ने की कोशिश
इस पहल में
पर्यावरण संरक्षण को तकनीक से जोड़ा गया है। मोबाइल और QR कोड की मदद से लोग आसानी से पेड़ों के बारे में जानकारी
हासिल कर सकेंगे। इससे लोगों में पेड़ों के प्रति लगाव बढ़ेगा और वे पर्यावरण को
बचाने के लिए ज्यादा जागरूक होंगे।
चिड़ियाघर के मुख्य
चिकित्साधिकारी डॉ योगेश प्रताप सिंह ने इस प्रयास को एक बेहतर कदम बताया है।
अधिकारियों का कहना है कि इससे चिड़ियाघर सिर्फ घूमने की जगह नहीं रहेगा, बल्कि लोगों को प्रकृति के बारे में जानकारी देने वाला
केंद्र भी बनेगा। पेड़ों को पहचान देने की यह पहल आने वाले समय में दूसरे शहरों के
लिए भी उदाहरण बन सकती है। तकनीक और पर्यावरण को जोड़कर पौधों को बचाने की दिशा
में यह एक नई कोशिश है।