दो पोखरों का होगा सुंदरीकरण, 8 करोड़ खर्च होंगे, घाट, पाथवे, ओपन जिम का होगा निर्माण, लगेगी सोलर लाइट
रूरल न्यूज नेटवर्क।जल संरक्षण एवं सुंदरीकरण को बढ़ावा देने के लिए
शहर के दो पोखरों का सुंदरीकरण किया जाएगा। इसके लिए अमृत 2.0 योजना के तहत 8 करोड़ रुपये खर्च
किए जाएंगे। शाहपुर वार्ड के खैरया पोखरा एवं भरवलिया के पोखरे का इसके लिए चयनित
किया गया है। इन्हें अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जाएगा।
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राज्य स्तरीय समिति की ओर से दोनों परियोजनाओं को प्रशासनिक
और वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। जल्द ही इसका शासनादेश जारी होने की
सभावना है। इसके बाद नगर निगम की ओर से टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। दोनों
पोखरों के जीर्णोद्धार से आसपास के लोगों को काफी फायदा होगा। लोगों को बेहतर
सुविधाएं मिल सकेंगी।नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अमृत 2.0 योजना के तहत कुल
पांच पोखरों के विकास का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा था, जिसकी अनुमानित लागत करीब 22.69 करोड़ रुपये थी। प्रस्तावित परियोजनाओं में
शाहपुर के खरैया पोखरा के लिए 4.73 करोड़ रुपये और
भरवलिया पोखरा के लिए 3.28 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था।इसके अलावा अन्य तीन पोखरों देवी प्रसाद नगर के पथरा पोखरा, डा. राजेंद्र प्रसाद नगर (चित्रगुप्त नगर
कालोनी) का पोखरा और उर्वरक नगर क्षेत्र का तेनुघिया पोखरा भी प्रस्ताव में शामिल
थे। फिलहाल प्रथम चरण में खरैया और भरवलिया पोखरा को स्वीकृति मिल गई है।
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इन दोनों सरोवरों के पुनर्विकास के तहत कई आधुनिक सुविधाएं
विकसित की जाएंगी। आसपास के घरों से निकलने वाले गंदे पानी को सीधे पोखरों में
गिरने से रोकने के लिए नालियों को टैप किया जाएगा। इसके साथ ही पोखरों की तलहटी की
सफाई कर उन्हें गहरा और स्वच्छ बनाया जाएगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट और
सीढ़ियों का निर्माण कराया जाएगा, वहीं किनारों पर पाथवे और साइड पटरी बनाई जाएगी
ताकि लोग टहल सकें।
इसके अतिरिक्त, परिसर में टायलेट
ब्लाक, ओपन जिम, गार्डन बेंच और
सजावटी लाइटों की व्यवस्था की जाएगी। हरियाली बढ़ाने के लिए पौधरोपण किया जाएगा और
ऊर्जा बचत के लिए सोलर लाइटें भी लगाई जाएंगी। अतिक्रमण रोकने के उद्देश्य से पूरे
क्षेत्र की घेराबंदी कर चहारदीवारी बनाई जाएगी।
इन दोनों पोखरों का धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी
विशेष महत्व है। छठ महापर्व के दौरान बड़ी संख्या में व्रती महिलाएं यहां
पूजा-अर्चना करती हैं। ऐसे में इनके विकसित होने से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं
मिलेंगी और आयोजन अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेंगे।