बसपा ने प्रत्याशियों की तलाश तेज की
गोरखपुर: जिले में शहर विधानसभा क्षेत्र छोड़ दें तो हर सीट पर सपा व बसपा में एक से अधिक दावेदार हैं। इनमें कई स्थापित नेता हैं। वर्तमान में सभी सीटों पर भाजपा के विधायक हैं लेकिन लंबे समय से हाईकमान का कहा मान रहे कुछ नेता इस बार चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं और प्रचार अभियान भी तेज कर दिया गया है।शहर के कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र में लड़ाई कांटे की होने वाली है। यहां भाजपा से फतेहबहादुर सिंह विधायक हैं। सपा से साधु यादव दावेदार हैं लेकिन एक और नेता नवीन यादव ने भी अपनी दावेदारी की है। ऐसे में यदि कोई बागी हुआ तो बसपा का साथ भी पकड़ सकता है। यहां भाजपा के भी एक वरिष्ठ नेता पिछले दिनों बसपा सुप्रीमो से मिल चुके हैं, वह भाजपा से भी दावेदार हैं और प्लान बी भी तैयार कर चलना चाहते हैं।पिपराइच विधानसभा क्षेत्र में भाजपा में टिकट के लिए मारामारी नजर आ रही है। विधायक महेंद्रपाल के अलावा पूर्व मंत्री जितेंद्र जायसवाल उर्फ पप्पू भैया भी भाजपा से ही दावेदारी कर रहे हैं। बसपा इस सीट पर भी नजर बनाए हुए है। यहां से भी कोई असंतुष्ट यदि हर हाल में चुनाव लड़ने पर आया तो बसपा उसके लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। पार्टी भी इसीलिए अभी दावेदारों को परख रही है।
विधानसभा चुनाव 2027 में बसपा 'करो या मरो' की स्थिति में है। बूथ व सेक्टर स्तर पर समितियों को मजबूत बनाने के बीच विधानसभा क्षेत्रों से मजबूत प्रत्याशियों की तलाश भी शुरू हो गई है। लगभग सभी विधानसभा क्षेत्र से कई नेता पार्टी के संपर्क में हैं। वरिष्ठ पदाधिकारियों से मिल रहे हैं लेकिन इनमें से अधिकतर का राजनीतिक प्रोफाइल बड़ा नहीं है। पार्टी सुप्रीमो की नजर भी ऐसे प्रत्याशियों पर है, जिनके मैदान में उतरने से माहौल बने और पहले से उनका नाम चर्चा में हो। चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र में यह तलाश पूरी हो चुकी है। वहां भाजपा की वरिष्ठ नेता रहीं अस्मिता चंद को प्रत्याशी घोषित कर दिया गया है।सहजनवा क्षेत्र में भाजपा के साथ सपा में भी भारी घमासान है। यहां के पूर्व विधायक यशपाल रावत सपा से प्रबल दावेदार हैं। उनका अपना जनाधार भी है। लेकिन कई ब्राह्मण व क्षत्रिय नेता भी सपा से दावेदारी करना चाहते हैं। इसी तरह भाजपा के विधायक प्रदीप शुक्ला यहां से दोबारा टिकट के प्रबल दावेदार बताए जा रहे हैं। पूर्व विधायक स्व. रवींद्र सिंह के परिवार से उनके भतीजे आदित्य प्रताप सिंह आगू भी जनसंपर्क में जुटे हैं। बात चौरी चौरा की करें तो यहां से भाजपा के विधायक सरवन निषाद, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय के छोटे पुत्र हैं। सहयोगी दल होने के नाते उनका दाा मजबूत है। लेकिन पिछली बार निर्दल चुनाव लड़कर लगभग 30 हजार वोट पाने वाले टप्पू सिंह भी टिकट की दावेदारी में हैं। पूर्व विधायक व वर्तमान राज्यसभा सदस्य संगीता यादव का भी यहां हस्तक्षेप रहता है। इसी तरह समाजसेवी के रूप में अपनी पहचान बना रहे एसके शर्मा भी टिकट की जुगत में हैं। यहां भी भाजपा व सपा में कई दावेदार हैं। बसपा यहां अपने पुराने नेता को चुनाव लड़ाती रही है लेकिन इस बार कई और दावेदार हैं। भाजपा से टिकट न मिलने की स्थिति में बसपा के साथ जा सकते हैं। एक नेता ने तो बसपा सुप्रीमो से मुलाकात भी कर ली है।बांसगांव विधानसभा क्षेत्र से बसपा के पूर्व विधायक रहे डा. विजय एक बार फिर दावेदारी कर रहे हैं। वह बांसगांव से ही विधायक रहे हैं। उनके मैदान में आने से दलित बहुल इस क्षेत्र में बसपा की स्थिति मजबूत नजर आएगी। खजनी में भी पार्टी मजबूत प्रत्याशी की तलाश में है। एक बसपा नेता ने बताया कि पार्टी मजबूत लड़ाई चाहती है, इसलिए दूसरे दलों से बाकी होने वाले मजबूत चेहरों पर भी दांव लगाने से गुरेज नहीं होगा।