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खजनी में पीड़ित परिवार तहसील में अनशन पर, एसडीएम ने हटाया, सीओ को कार्रवाई का आदेश दिया
रूरल न्यूज नेटवर्क।खजनी थाना
क्षेत्र के डोहरियां प्राणनाथ गांव निवासी विंध्याचल निषाद और उनके परिवार ने जमीन
धोखाधड़ी के खिलाफ शुक्रवार, 12 जून को खजनी
तहसील गेट पर अनशन शुरू किया। एसडीएम खजनी राजेश प्रताप सिंह ने मौके पर पहुंचकर
परिवार को अनशन से हटाया और क्षेत्राधिकारी खजनी विवेक कुमार तिवारी को मामले की
निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई का आदेश दिया।
यह मामला विंध्याचल निषाद
की पैतृक जमीन से जुड़ा है। उनके भाई निठुरी की मृत्यु के 46 साल बाद एक महिला भानमती देवी को उनकी जीवित पत्नी बताकर
निठुरी के हिस्से की जमीन वरासत करा ली गई। इसके तीन दिन बाद ही जालसाजों ने उस
जमीन की रजिस्ट्री भी करा ली।
विंध्याचल निषाद ने बताया
कि उनके भाई निठुरी की हत्या 12 सितंबर 1979 को हुई थी, और उनकी पत्नी
परभौती की मृत्यु 20 अक्टूबर 1981 को हो गई थी। दोनों की कोई संतान नहीं थी, जिसके बाद उनके हक की जमीन 30 मार्च 1993 को विंध्याचल निषाद के नाम पर वरासत हो गई थी। इस दौरान
विंध्याचल निषाद कैंसर से पीड़ित थे, और उनका परिवार
उनकी देखभाल में व्यस्त था।
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विंध्याचल निषाद ने इसकी
शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से की, जिसके बाद खजनी
थाने में जालसाजों के खिलाफ केस संख्या 176/2026 में धोखाधड़ी
और जालसाजी की आठ गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। नामजद आरोपियों में
भानमती देवी, जगदंबा शुक्ल, सेराज अहमद, खालिद मुस्तफा और शिवरानी मिश्रा शामिल हैं।
मुकदमा दर्ज होने के बावजूद
कोई कार्रवाई न होने पर विंध्याचल निषाद अपने परिवार के साथ शुक्रवार सुबह 10 बजे तहसील गेट पर अनशन पर बैठ गए। एसडीएम राजेश प्रताप सिंह
ने उन्हें वहां से हटाते हुए क्षेत्राधिकारी विवेक कुमार तिवारी को घटना की
निष्पक्ष जांच कर त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
विंध्याचल निषाद ने आरोप
लगाया कि जालसाजी करने वाले प्रभावशाली लोग हैं, जिसके कारण
प्रशासन द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष
2011
में भी इसी तरह से जमीन हथियाने का प्रयास किया गया था, लेकिन तब उन्हें इसकी जानकारी हो गई थी और उन्होंने तहसील
में अपने पक्ष में साक्ष्य पेश किए थे। वर्ष 2016 में जालसाजों
का वह प्रयास विफल हो गया था और उन्हें अपनी जमीन वापस मिल गई थी।
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