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गोरखपुर / खोराबार
• 14-04-2026
एम्स के इमरजेंसी प्रभारी को फटकार, डॉक्टरों से मांगा जवाब, 5 साल की बच्ची को बिना इलाज रेफर करने पर कार्यकारी निदेशक ने की जांच
रूरल न्यूज नेटवर्क।एम्स की
इमरजेंसी से पांच साल की बच्ची को बिना उपचार रेफर करने के मामले में कार्रवाई तय
मानी जा रही है। एम्स की कार्यकारी निदेशक डॉ. विभा दत्ता ने इमरजेंसी के प्रभारी
को फटकार लगाई है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को गंभीर बताया है। डॉ. विभा दत्ता ने
खुद जांच की कमान संभाल ली है।
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उन्होंने इमरजेंसी में
तैनात सभी जिम्मेदार डॉक्टरों को तलब कर पूछताछ की, और इस कृत्य पर
कड़ी नाराजगी जताई। बच्ची के उपचार के समय जिन डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई गई थी, कार्यकारी निदेशक ने सभी से लिखित जवाब मांगा है। जवाब
मिलने के बाद ड्यूटी पर तैनात सीनियर रेजिडेंट और जूनियर रेजिडेंट पर कार्रवाई की
तलवार लटक रही है। इमरजेंसी प्रभारी को भी चेतावनी दी गई है। एम्स प्रशासन ने साफ
किया है कि लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
देवरिया जिले के नोनापार
निवासी राजन की पांच वर्षीय पुत्री खुशी 9 अप्रैल को छत
से गिर गई थी, जिससे उसका हाथ टूट गया और सिर में भी गंभीर चोट
आई। परिजनों ने उसे तत्काल देवरिया जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से बेहतर इलाज के लिए शनिवार सुबह एम्स गोरखपुर रेफर
कर दिया गया। सुबह करीब 11 बजे बच्ची के
चाचा ओमकार कुमार चौहान उसे लेकर एम्स की इमरजेंसी पहुंचे, जहां उसका पर्चा बनाकर उसे भर्ती कर लिया गया। आरोप है कि
जूनियर डॉक्टरों ने पूरे दिन बच्ची से जुड़ी पूरी हिस्ट्री नोट की। सीटी स्कैन में
सिर में खून का थक्का जमने की पुष्टि भी हुई, इसके बावजूद
उसे सही से उपचार नहीं मिला।
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देर रात बेड न होने का
हवाला देते हुए बच्ची को रेफर कर दिया गया। चाचा ओमकार कुमार चौहान ने बताया कि जब
उन्होंने डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ाना शुरू किया, तो उन्होंने
कहा कि "यदि 72 घंटे पहले आए
होते तो हम कुछ कर सकते थे।" यह स्थिति तब थी जब बच्ची पूरी तरह होश में थी, लेकिन उसे भर्ती करने की बजाय रेफर कर दिया गया।
इमरजेंसी व्यवस्था पर उठे
सवाल
एम्स की इमरजेंसी में
वर्तमान में सात डॉक्टरों के साथ छह सीनियर रेजिडेंट (एसआर), 16 जूनियर रेजिडेंट (जेआर) और 19 नर्सिंग ऑफिसर
की तैनाती है। इसके अलावा चार न्यूरो सर्जन भी मौजूद हैं। इतनी बड़ी व्यवस्था होने
के बाद भी इमरजेंसी में कोई उपचार नहीं हो पा रहा है। आरोप है कि इमरजेंसी में
अधिकतर जिम्मेदारी जेआर पर छोड़ दी जाती है, जबकि वरिष्ठ
डॉक्टर समय पर मरीजों को नहीं देखते। यही वजह है कि जेआर रात होते ही रोगियों को
रेफर करना शुरू कर देते हैं। एम्स प्रशासन दिन में तो इमरजेंसी पर नजर रखता है
लेकिन रात में कोई जांच नहीं की जाती है।
गोरखपुर एम्स के मीडिया
प्रभारी, डॉ. अरूप मोहंती ने बताया कि इमरजेंसी से बच्ची को
रेफर करने के मामले की जांच की जा रही है। इस प्रकरण से जुड़े सभी लोगों से जवाब
मांगा गया है। कार्यकारी निदेशक ने सभी से बात की है और स्पष्ट निर्देश दिया है कि
इमरजेंसी में उपचार में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न
हो।
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