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Wednesday, 1st April, 2026
खोराबार
सुब्रत पाण्डेय, डिस्ट्रिक्ट एडिटर रूरल न्यूज़ नेटवर्क गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर मे चल रहे पुस्तक मेला में लेखक मंच पर "पंडान जल रहा है", किताब की परिचर्चा की खबर गोरखपुर के सुधी पुस्तक प्रेमियों के बीच में थी। तमाम जिज्ञासा और कौतुहल के साथ लोग लेखक मंच पंडाल में जुटने लगे। तरह-तरह के प्रश्न थे।
पंडान क्या है़? कैसे जल रहा है? क्यों जल रहा है? वरिष्ठ आई. ए. एस. अधिकारी रहे डा. अजय शंकर पाण्डेय लेखक कैसे बन गए? घायल, दामिनी, अंदाज अपना अपना, बरसात, घातक, चाईना गेट, द लेजेण्ड आफ भगत सिंह, खाकी जैसी सुपरहिट फिल्मों के प्रोडयूसर-डायरेक्टर राजकुमार संतोषी इस पुस्तक मेले में मुंबई से वर्चअल क्यों जुड रहे हैं?
विख्यात साहित्यकार रामदेव शुक्ल, नामी गिरामी पत्रकार हर्षवर्धन शाही एवं सम्मानित प्रो. कुमार हर्ष लेखकीय मंच साझा क्यों कर रहे हैं? कार्यक्रम शुरू होते ही लोगों के एक-एक प्रश्न का उत्तर मिलना शुरू हो गया। दरअसल पंडान जल रहा है, यह एक उपन्यास हेै जो सच्ची घटनाओं का संग्रह है।
डा. अजय शंकर जो अपने आई.ए.एस कार्यकाल में खूब चर्चा में रहते थे। उन्होंने 37 वर्ष के प्रशासनिक जीवन में ग्राम पंचायतों के चुनाव में जिन विसंगतियों और उनके यथार्थ को देखा, उसी का चलचित्र सरीखा वर्णन उन्होंने "पंडान क्यों चल रहा है" नामक अपनी पुस्तक में किया है। रूरल न्यूज नेटवर्क संवाददाता से हुई विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि प्रधानी के चुनाव में अधिसूचना से लेकर चुनाव परिणाम तक की घटनाओं के दौरान खेली जाने वाली राजनीतिक चालबाजियों को रोचक तरीके से इस किताब में प्रस्तुत किया गया है।
पंडान जल रहा है नामक पुस्तक के विमोचन पर खुद को वर्चुअल होने से नहीं रोक सके सुपरहिट फिल्मों के मशहूर प्रोडयूसर व डायरेक्टर राजकुमार संतोषी। उन्होंने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि यह पुस्तक भारत की ग्रामीण राजनीति का एक सजीव दस्तावेज है। इसी क्रम में लेखक-पत्रकार कुमार हर्ष ने पुस्तक में वर्णित तमाम प्रसंगों का आलोचनात्मक मूल्यांकन श्रोताओं के समक्ष रखा। उपन्यास के पात्रों बंगगी दादा और दुर्गा सिंह के राजनीतिक हथकंडों को साझा करके उन्होंने श्रोताओं को खूब हंसाया। राज्य सूचना आयुक्त रहे वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन शाही ने उपन्यास के एक प्रमुख पात्र सी. पी. पांडेय के सफेदपोश चरित्र का समीक्षात्मक मूल्यांकन कर पुस्तक पर सारगर्भित टिप्पणी की।