पत्नी से तंग आकर इंजीनियर ने सुसाइड किया, मंदिर में पूजा की, वीडियो में फंदा दिखाकर बोला- मेरा सेहरा तैयार
रूरल न्यूज नेटवर्क।पत्नी की
प्रताड़ना से परेशान होकर 33 साल के
इंजीनियर ने आत्महत्या कर ली। उसने पहले मंदिर में पूजा की। फिर मंदिर के पास पेड़
पर फंदा लगाया और लटककर जान दे दी। सुसाइड से पहले उसने वीडियो बनाया।
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फंदे को दिखाते हुए
इंजीनियर ने कहा, मेरा सेहरा
तैयार है। अब मुझे जाने की खुशी है। मेरे मरने का समय नहीं है, लेकिन पत्नी के अत्याचार से जीने की इच्छा नहीं है। उसने
मेरे साथ इतने अत्याचार किए हैं कि शायद ही कोई सोच पाए। दोस्तों, जिंदगी में बहुत तड़पा हूं।इंजीनियर का शव जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर कुसुम्ही जंगल में लटका मिला। इंजीनियर
प्रद्युम्न यादव कुशीनगर के रहने वाले थे। वह मध्य प्रदेश की एक प्राइवेट कंपनी
में जॉब करते थे।9 साल पहले उनकी
शादी हुई थी। पिछले 6 साल से पत्नी
से विवाद था। इसका मुकदमा कुशीनगर कोर्ट में चल रहा था। 12 मई को सुनवाई थी। इसके लिए इंजीनियर प्रद्युम्न यादव इंदौर
से आए थे।
प्रद्युम्न ने वीडियो में कहा
हार गया यार जिंदगी की जंग।
बहुत दुख देखे हैं। दुख देने वाला कोई और नहीं, मेरी वाइफ है।
सभी लोगों से रिक्वेस्ट है- कोई यह मत बोले कि बेसमय चला गया। मेरे जाने का अभी
समय नहीं था।
पिछले एक-डेढ़ महीने से मेरे
दिमाग में यही चल रहा था कि बेटा, सुसाइड कर ले।
ठीक है, आज वह समय आ गया। मैं अपने बड़े भाई को एक संदेश
देना चाहता हूं। भाई, कभी मां-बाप को
यह एहसास मत होने देना कि एक बेटा दुनिया से चला गया।
हालांकि, मैं गलती तो कर रहा हूं। हर मां-बाप को लगता है कि बुढ़ापे
में बेटा सहारा बनेगा, लेकिन मैं
सहारा न बनकर बहुत दुख दे रहा हूं। मैं इस समय जा रहा हूं तो मुझे पता है कि
उन्हें कितनी पीड़ा होगी, लेकिन अपनी
पीड़ा के आगे उनकी पीड़ा भूल जा रहा हूं।
9 साल पहले हुई
थी शादी, 5 साल की बेटी
प्रद्युम्न
कुमार कुशीनगर नगर पंचायत के स्वामी विवेकानंद नगर के रहने वाले थे। पिता का नाम
उमापति यादव (78) और मां का नाम कलावती देवी
(72)
है। इंजीनियर प्रद्युम्न की 2 जून 2017 को तुर्कपट्टी थाना क्षेत्र के सोहाग गांव निवासी हरिशंकर
यादव की बेटी अर्पिता यादव से शादी हुई थी।
दोनों की एक 5 साल की बेटी भी है। प्रद्युम्न के भाई राघवेंद्र के अनुसार, अर्पिता शादी के बाद 3 महीने ससुराल
में रही, लेकिन उसके बाद मायके चली गई। करीब 4 महीने बाद वह ससुराल आई, तो प्रद्युम्न
उसे लेकर दिल्ली चले गए। उस समय वह दिल्ली में जॉब करते थे।परिजनों के अनुसार, पत्नी ने
दिल्ली में पति का गला दबाकर जान लेने की कोशिश की। इसके बाद पति ने उसे मायके भेज
दिया। अर्पिता जब मायके वापस गई, तो उसने पति पर
दहेज उत्पीड़न का केस दर्ज करा दिया। इसके अलावा भरण-पोषण का मुकदमा भी कर दिया।
इस मामले में सुनवाई चल रही थीराघवेंद्र के
अनुसार, 12 मई को अर्पिता के भरण-पोषण
वाले केस में पडरौना कोर्ट में सुनवाई थी। प्रद्युम्न इसी केस के लिए 10 मई को इंदौर से कुशीनगर आए थे। कोर्ट में सुनवाई के बाद
अगली तारीख 21 जुलाई पड़ी। प्रद्युम्न
बेहद तनाव में थे। केस के लिए उन्हें बार-बार छुट्टी लेकर आना पड़ता था।
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सुनवाई के बाद वह हाटा
स्थित अपने जीजा के घर चले गए। वहां से उन्हें गोरखपुर जाना था, जहां से ट्रेन पकड़नी थी। रास्ते में कुसुम्ही जंगल पड़ता
है,
इसलिए वह बुढ़िया माई मंदिर में दर्शन के लिए रुक गए। दर्शन
के बाद मंदिर के पास एक पेड़ पर गमछा बांधकर फंदा बनाया और इसके बाद एक वीडियो शूट
किया।
प्रद्युम्न ने वीडियो को
व्हाट्सऐप स्टेटस पर लगाया और फिर आत्महत्या कर ली। काफी देर बाद किसी गांववाले ने फंदे से लटका शव देखा और पुलिस को सूचना दी। पुलिस
ने आईडी और मोबाइल के आधार पर पहचान कर परिजनों को सूचना दी।
मेरा भाई पहले से ही बहुत
परेशान था- प्रदुम्न का भाई
प्रदुम्न के भाई राघवेंद्र
यादव ने बताया- मेरा भाई रोबोट इंजीनियर था जो ऑटोमोबाइल सेक्टर में काम करता था, शुरुआत गुड़गांव से हुई इस समय मध्य प्रदेश किसी कंपनी में
काम करता था, हालांकि वह कितना कमाता इस पर मैं ज्यादा बात
नहीं करता, क्योंकि जो लड़का ऑलरेडी इतना परेशान है। उसे हम
क्या उम्मीद रखते हैं।
पिताजी 2007 में रिटायर हुए जो उत्तर प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में डेरी
डेवलपमेंट ऑफिसर के पद पर काम किए थे, शुरुआती पढ़ाई
मेरे भाई ने कुशीनगर में की थी। वर्क एक्सपीरियंस को देखते हुए भी उसे प्रमोट किया
गया। मैं भी काफी पहले विदेश में नौकरी करता था।
वारंट के बाद भागा-भागा फिर
रहा था
आखरी बार जो सुनवाई हुई
उसमें उसका 125 का खर्चा बहाल हो गया था, जो काफी अनर्गल था। रिकवरी के लिए 8 हजार प्रति महीने देना था, उन्होंने 128 किया था, जो आज बीएनएस की धारा में 147 हो गया है। 384000
के आसपास की वसूली
निश्चित हुई थी, उसी को देखते हुए वारंट हुआ था। इसके बाद वह भागा
भागा फिर रहा था।
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