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• gorakhpur, cm yogi, digital arreste • गोरखपुर / उरूवा • 15-06-2026

आतंकी कनेक्शन बताकर पति-पत्नी को 2 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा, गोरखपुर से पुणे आने को कहा, ATS अधिकारी बनकर 5 लाख हड़पे

रूरल न्यूज नेटवर्क साइबर ठगों ने एक बुजुर्ग पति-पत्नी को आतंकवाद के मामले में फंसाने का डर दिखाकर दो दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा। खुद को NIA और ATS का अधिकारी बताने वाले जालसाजों ने दंपति से 5 लाख रुपए भी अपने खाते में ट्रांसफर करा लिए। ठगी का पता चलने पर उनके बेटे ने साइबर क्राइम थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। आरोपी के बैंक खाते का डिटेल निकलवाया जा रहा है। घटना बेलघाट थाना क्षेत्र की है। बेलघाट थाना क्षेत्र के चौतरा तिवारी निवासी शैलेंद्र कुमार तिवारी ने साइबर क्राइम थाने में तहरीर दी है। उन्होंने बताया कि उनके पिता धनुषधारी तिवारी के मोबाइल पर 17 फरवरी 2026 को एक कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि आपके आधार कार्ड से जम्मू कश्मीर के एक बैंक में खाता खोला गया है। एक आतंकवादी पकड़ा गया है, उसने आपके खाते में पैसे का लेन किया है।

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उन्हें अगले दिन पुणे स्थित एनआईए कार्यालय में आकर रिपोर्टिंग करने के लिए कहा गया। धनुषधारी तिवारी ने कहा कि इतनी जल्दी पुणे पहुंच पाना मुश्किल है। तब कॉलर ने बोला कि अभी मेरे सर की कॉल आएगी। उसे रिसीव कर लेना।

कुछ देर बाद दूसरे नंबर से व्हाट्सएप कॉल आई। उस व्यक्ति ने खुद को गोरखपुर एटीएस का अधिकारी बताया। इसके बाद व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से बातचीत करते हुए कहा कि अपने सारे डॉक्यूमेंट चेक होने तक डिजिटल अरेस्ट रहेंगे, इसलिए वीडियो कॉल पर बने रहना है। इसी बीच एक और व्यक्ति आया, उसने जांच के नाम पर 5 लाख रुपये जमा करने के लिए दबाव बनाते हुए कहा कि आरबीआई की रसीद भी देंगे। जांच के बाद खाते में पैसे वापस कर दिए जाएंगे।

18 फरवरी को धनुषधारी तिवारी ने एसबीआई चरगांवा की पीबी शाखा में अपनी एफडी तुड़वाई और 19 फरवरी को ठगों द्वारा बताए गए बैंक खाते में पांच लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद व्हाट्सएप पर भारतीय रिजर्व बैंक की कथित रसीद और भारत सरकार की मुहर लगे फर्जी दस्तावेज भी भेजे गए। अगले दिन सभी मोबाइल नंबर बंद हो गए। 2 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रहने के बाद दंपति को ठगी का एहसास हुआ। 22 फरवरी को साइबर क्राइम कार्यालय पहुंचकर एनसीआरपी पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई गई। इस संबंध में एसपी क्राइम सुधीर जायसवाल ने बताया कि मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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डिजिटल अरेस्ट से बचने के टिप्स

"डिजिटल अरेस्ट" एक नया फ्रॉड है जहां स्कैमर वीडियो कॉल करके खुद को एनआईए, CBI, ED, पुलिस, कस्टम ऑफिसर बताते हैं। इसके बाद कहते हैं कि वीडियो कॉल पर रहो वरना अरेस्ट हो जाओगे।

1. याद रखें: कोई भी एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती। पुलिस, CBI, RBI, TRAI किसी को भी वीडियो कॉल पर हिरासत में नहीं रखते। ये 100% फ्रॉड है।

2. कॉल काटें, नंबर ब्लॉक करें। जैसे ही "डिजिटल अरेस्ट", "सीक्रेट केस", "स्काइप वेरिफिकेशन" शब्द सुनें, तुरंत कॉल काटें। डर के मारे कॉल पर बने रहना ही उनका हथियार है।

3. पैसे न भेजें- "सेटलमेंट", "बेल", "वेरिफिकेशन फीस" के नाम पर UPI/बैंक ट्रांसफर मांगेंगे। असली एजेंसी ऐसा कभी नहीं करती।

4. कॉल रिकॉर्डिंग और स्क्रीन शेयर न करें। स्कैमर स्क्रीनशेयर लेकर आपका बैंक ऐप खोलवा लेते हैं। OTP, पासवर्ड स्क्रीन पर न दिखाएं।

5. वेरिफाई करें- कहें "मैं खुद थाने आकर बात करूंगा"। असली अधिकारी मना नहीं करेंगे। नंबर को 1930 पर वेरिफाई करें।

6. तुरंत रिपोर्ट करें- - साइबर हेल्पलाइन: 1930 - वेबसाइट: cybercrime.gov.in - स्क्रीनशॉट, नंबर, बैंक डिटेल सेव करके रखें

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